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Mumbai, Maharashtra, Apr 02, महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ने सम्मानित नागपुर के मूर्धन्य साहित्यकारों का “नगर सत्कार” किया।
गजानन महतपुरकर ने आज बताया कि महाराष्ट्र के मुंबई में आयोजित महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के वर्ष 2024- 25 के पुरस्कार समारोह में सम्मानित होने वाले नागपुर के मूर्धन्य साहित्यकारों के नगर सत्कार का गरिमापूर्ण समारोह अकादमी की उपाध्यक्षा और नागपुर प्रतिनिधि श्रीमती प्रियंका शक्ति ठाकुर की अध्यक्षता में विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन के साकेत सभागार में सम्पन्न हुआ।
इस समारोह में मीरा जोगलेकर की सरस्वती वंदना के बाद अकादमी की उपाध्यक्षा प्रियंका ठाकुर का स्वागत रूबी दास ‘ अरु ‘ ने किया। संचालन करते हुए प्रस्तावना में साहित्यकार अविनाश बागड़े ने अकादमी द्वारा पुरस्कृत और जिन्हें इस वर्ष सम्मान नहीं मिल सका, ऐसे व्यक्तियों की प्रतिक्रियाओं को एक सहज मानवीय प्रवृति बताया।
मुख्य कार्यक्रम में नागपुर के वरिष्ठ साहित्यकारों इंदिरा किसलय, कृष्ण नागपाल, प्रभा ललित सिंह, सत्येंद्र प्रसाद सिंह, माधुरी मिश्रा और संतोष बादल ने अकादमी द्वारा सम्मानित तीनों सत्कार मूर्तियों का सत्कार किया। तत्पश्चात तीनों ने अपने अपने मनोगत व्यक्त किये। आभा सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि पुरस्कार या सम्मान को लक्ष्य में रखकर कोई भी शब्दशिल्पी रचना नहीं करता। रचना में अन्तर्निहित सत्य ही उसे सम्मान दिलाता है।रचनाकार का काम है पूरी निष्ठा से लेखन करना अगर उसका लेखन उत्कृष्ट है, तो पाठक उसे निश्चय ही श्रेय देंगे।
डाॅ. मनोज पाण्डे की स्वाभाविक उक्ति थी कि हर व्यक्ति को सम्मान अच्छा लगता है और सच्चे सम्मान से नई ऊर्जा मिलती है। उन्होंने कहा कि सम्मान उसी को मिलना चाहिये, जो उसका हकदार है। प्रारब्ध से जो कुछ मिला उसे और अधिक बेहतर बनाने का प्रयास होना चाहिये।
वरिष्ठ साहित्यकार रामकृष्ण सहस्त्रबुद्धे ने निरूपित किया कि सम्मान तो सृजनधर्मिता का प्रतीक है।मेरे सृजन के पहले पाठक मेरे पिता थे। उन्होंने कहा कि पुरस्कार प्रेरणा देते हैं तथा साथ में समाज को दिशा देने की चुनौती भी पेश करते हैं। अत: शब्दों की सार्थकता इसी में है कि वह पाठक को आन्दोलित करे। हम अगर शब्दोपासक हैं, तो उसके प्रयोग के प्रति सचेत रहें।वैचारिक परिवर्तन की भूमिका में खरे उतरते हैं, तो यह सृजन का सच्चा अवदान है।
अकादमी की उपाध्यक्षा श्रीमती प्रियंका ठाकुर ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि पद की गरिमा को बनाये करना काफी मुश्किल है। उन्होंने कहा कि नागपुर के रचनाकारों के लिए सम्मान का यह उत्सव अत्यन्त सुखद है। विशेषतः महिला रचनाकारों को सम्मान मिलना अधिक गौरवपूर्ण है, क्योंकि वे घर, नौकरी और व्यवसाय के साथ लेखन का चुनौतीपूर्ण दायित्व सम्भालती हैं। उन्होंने कहा कि नागपुर साहित्य के क्षेत्र में उत्तरोत्तर अपना महत्वपूर्ण योगदान दर्ज कर रहा है। उन्होंने बताया कि “स्वर्णिम साल आर एस एस” -पर मैं काम कर रही हूॅं और चाहती हूॅं कि यह काम पाठकों तक पहुँचे।
टीकाराम साहू आजाद ने कहा कि सम्मान सभी को प्रोत्साहित करता है। उन्होंने चिंता जताई कि अखबारों से साहित्य गायब होता जा रहा है। ऐसे में अगर श्रेष्ठ लेखन लोगों तक न पहुँचे, तो उसकी उपादेयता क्या है।
आभार प्रदर्शन करते हुए एस पी सिंह ने “जमीन के हर जर्रे को आफ़ताब कर देंगे” इस विश्वास को सृजन की नींव बताया और कहा कि जब तक हम दूसरों की खुशियों में शरीक न होंगे, हमारी खुशी में कौन शरीक होगा। कार्यक्रम के गरिमामय स्वरूप को द्विगुणित करने हेतु साकेत सभागार में किशन शर्मा, सुप्रसिद्ध मंच संचालक, नीरज श्रीवास्तव संपादक पावर ऑफ वन, अजय पांडे वरिष्ठ पत्रकार, मुकेश कुमार सिंह,पूनम मिश्रा, देवयानी बनर्जी, बनर्जी सर, सिंह साहब, रामटेके सर, रुचिता, डॉ सुमिता कोंडबतुनवार , मंजूषा किंजवड़ेकर और उमाशंकर नामदेव ने प्रमुख भूमिका निभाई।

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