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New Delhi, Mar 25, शिक्षा मंत्रालय ने “बालपन की कविता पहल: छोटे बच्चों के लिए भारतीय कविताओं को पुनर्स्थापित करना” शुरू किया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)  2020, बहुभाषावाद की शक्ति और प्राथमिक शिक्षा में बच्चों की भाषाओं को शामिल करने के महत्व के साथ-साथ सार्वभौमिक और उच्च-गुणवत्ता वाली प्रारंभिक बाल शिक्षा के महत्व पर जोर देती है। एनईपी 2020 के दृष्टिकोण को संपूर्ण करने के लिए, स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएंडएल), शिक्षा मंत्रालय ने भारतीय संदर्भ के लिए प्रासंगिक सामग्री पर फोकस करते हुए सभी भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी में नर्सरी कविताओं का एक संग्रह तैयार करने के लिए “बालपन की कविता पहल: छोटे बच्चों के लिए भारतीय कविताओं को पुनर्स्थापित करना” शुरू किया है।
इस पहल का मकसद यह है कि छोटे बच्चे अपनी मातृभाषा में आसानी से समझ में आने वाली और आनंददायक कविताओं के ज़रिए, अपने आसपास की दुनिया से परिचित होकर जीवन के शुरूआती दौर में बेहतर सीख हासिल कर सकें।
इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए, डीओएसईएंडएल, माय गॉव के सहयोग से “बालपन की कविता पहल: छोटे बच्चों के लिए भारतीय कविताओं को पुनर्स्थापित करना” में योगदान आमंत्रित कर रहा है। इस प्रतियोगिता के प्रतिभागी तीन श्रेणियों के अंतर्गत लोकसाहित्य में प्रचलित मौजूदा कविताएँ (लेखक का नाम बताते हुए) या नई रचित मज़ेदार कविताएँ भी भेज सकते हैं। प्री-प्राइमरी (आयु 3-6), ग्रेड 1 (आयु 6-7), ग्रेड 2 (आयु 7-8)।
प्रविष्टियाँ, सभी भारतीय भाषाओं (भारतीय भाषा), साथ ही अंग्रेज़ी में आमंत्रित की जाती हैं, इसके अलावा इसमें क्षेत्रीय कविताएँ भी शामिल हो सकती हैं, जो भारतीय संदर्भ में सांस्कृतिक महत्व रखती हैं। प्रतियोगिता 26.03.2025 से 22.04.2025 तक माय गॉव वेबसाइट पर शुरू हो रही है। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए कोई प्रवेश शुल्क नहीं है। प्रतियोगिता की अन्य जानकारी मायगॉव वेबसाइट पर देखी जा सकती है।

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