~जीएसटी की अलग-अलग व्याख्याओं से गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में इसबगोल कारोबार प्रभावित हुआ है। आईपीए ने प्राकृतिक इसबगोल बीजों पर जीएसटी को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर स्पष्टता मांगी।
Ahmedabad, Gujarat, Aug 25 (VNI): इसबगोल प्रोसेसर्स एसोसिएशन (आईपीए) ने जीएसटी काउन्सिल, वित्त मंत्रालय, सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (सीबीआईसी) और टैक्स रिसर्च यूनिट (टीआरयू) से प्राकृतिक रूप से प्राप्त इसबगोल (Psyllium) बीजों पर जीएसटी प्रावधानों को लेकर तत्काल राष्ट्रीय स्तर पर स्पष्टीकरण जारी करने का आग्रह किया है। जीएसटी अधिकारियों की अलग-अलग व्याख्याओं के कारण गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के प्रमुख इसबगोल व्यापार एवं प्रोसेसिंग बाजारों में कारोबार प्रभावित हुआ है।
आईपीए अध्यक्ष अश्विन नायक ने मंगलवार को यहां कहा कि मुख्य सवाल यह है कि किसानों से सीधे प्राकृतिक अवस्था में खरीदे गए, बिना जानबूझकर सुखाए या प्रोसेस किए गए इसबगोल बीजों को ‘ताजा’ मानकर शून्य जीएसटी के दायरे में रखा जाए या ‘सूखे’ बीज मानकर 5 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाए। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा सीबीआईसी के उस एफएक्यू के मद्देनजर महत्वपूर्ण है, जिसमें ताजे इसबगोल बीजों पर शून्य जीएसटी तथा सूखे या फ्रोजन बीजों पर 5 प्रतिशत जीएसटी की बात कही गई है।
श्री नायक ने बताया कि गुजरात अथॉरिटी फॉर एडवांस रूलिंग ने 29 मई, 2026 के आदेश GUJ/GAAR/R/2026/21 में किसानों से एपीएमसी नीलामी के माध्यम से सीधे खरीदे गए और बिना सुखाए, जमाए, कुचले या अन्य तरीके से प्रोसेस किए गए प्राकृतिक, कच्चे एवं अनप्रोसेस्ड इसबगोल बीजों को ‘ताजा इसबगोल’ माना और उन्हें जीएसटी से मुक्त माना। इसके विपरीत, राजस्थान में हालिया फैसलों में अलग रुख अपनाया गया है। In Re: M/s Surendra Bucha (RAJ/AAR/2026-27/03) मामले में राजस्थान एएआर ने एपीएमसी कारोबारियों द्वारा प्रोसेसिंग यूनिट्स को आपूर्ति किए जाने वाले इसबगोल बीजों पर 5 प्रतिशत जीएसटी लागू माना।
आईपीए के अनुसार, अलग-अलग व्याख्याओं से कारोबारियों में संभावित कर मांग, ब्याज और जुर्माने को लेकर आशंका पैदा हुई है, जिसके कारण वे बिल जारी करने से हिचक रहे हैं। इसका असर किसानों की उपज की बिक्री और प्रोसेसिंग यूनिट्स को कच्चे माल की उपलब्धता पर भी पड़ रहा है। देश के प्रमुख इसबगोल व्यापार केंद्रों में शामिल ऊंझा में जीएसटी विवाद के कारण कारोबार लगभग ठप होने और उद्योग जगत द्वारा एक समान कर व्यवस्था के स्पष्ट होने का इंतजार किए जाने की स्थिति सामने आई है।
उन्होंने कहा कि इसबगोल बीजों का मुख्य उपयोग इसबगोल हस्क के उत्पादन में कच्चे माल के रूप में होता है। आईपीए के अनुसार, तैयार इसबगोल हस्क का लगभग 90 प्रतिशत निर्यात किया जाता है, जबकि करीब 10 प्रतिशत घरेलू बाजार में 5 प्रतिशत जीएसटी के साथ बेचा जाता है। एसोसिएशन ने कहा कि प्राकृतिक रूप से प्राप्त बीजों पर जीएसटी लगाए जाने से बड़ी मात्रा में इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में कार्यशील पूंजी फंस सकती है। उद्योग ने जीएसटी परिषद, वित्त मंत्रालय, सीबीआईसी और टीआरयू से ऐसी स्पष्ट एवं समान राष्ट्रीय व्यवस्था जारी करने की मांग की है, जिससे किसानों, कारोबारियों, प्रोसेसिंग यूनिट्स और निर्यातकों के लिए कर अनुपालन में एकरूपता सुनिश्चित हो सके। VNI NEWS, Psyllium GST, Isabgol GST, Psyllium Seeds, IPA, GST Council, Isabgol Trade, Unjha Isabgol Market, Isabgol, Psyllium Seeds, Isabgol Processors Association, CBIC, Gujarat, Unjha, Agriculture, Export, VNINews, VNINews.com
