New Delhi, Feb 21, अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 21 फरवरी के अवसर पर, सी. पी. राधाकृष्णन, उपराष्ट्रपति ने उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में भारत के संविधान का गुजराती और तमिल भाषा में अद्यतन संस्करण तथा नवीनतम विधिक शब्दावली (अंग्रेजी-हिंदी) जारी किया।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि यह आयोजन राष्ट्र की आधारभूत दस्तावेज को उसके अद्यतन संस्करण में अधिक क्षेत्रीय भाषाओं में सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश, जो पढ़ा गया, इसने भाषाई समावेशिता के महत्व को मान्यता दी तथा संविधान और कानूनों तक नागरिकों की पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
उन्होंने विधायी विभाग के प्रयासों की सराहना की, जिसने गुजराती और तमिल भाषाओं में संविधान का अद्यतन संस्करण तथा सरल हिंदी शब्दों का उपयोग करके अंग्रेजी-हिंदी विधिक शब्दावली का नवीनतम संस्करण जारी किया।
इस अवसर पर अर्जुन राम मेघवाल, विधि और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने विभाग के कार्य की प्रशंसा की तथा अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने 1952 में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में बंगाली भाषा की रक्षा के लिए उर्दू के थोपे जाने के विरुद्ध संघर्ष का स्मरण किया। उन्होंने यूनेस्को प्रस्ताव, संयुक्त राष्ट्र महासभा प्रस्ताव तथा 2008 को अंतर्राष्ट्रीय भाषा वर्ष घोषित करने का उल्लेख किया। उन्होंने 25 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति द्वारा संथाली संस्करण के प्रथम संस्करण के विमोचन तथा इस पहल की उनकी सराहना का स्मरण किया।
डॉ. राजीव मणि, विधायी विभाग के सचिव ने गुजराती और तमिल भाषाओं में संविधान तथा अंग्रेजी-हिंदी विधिक शब्दावली के आठवें संस्करण को जारी करने के विभाग के प्रयासों पर विस्तार से बताया। उन्होंने संविधान के अनुवादित और अद्यतन भाषाओं की सूची दी, जिसमें संथाली का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने क्षेत्रीय भाषा इकाई, राजभाषा विंग तथा विधायी विभाग के अधिकारियों के योगदान की सराहना की।
