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~हिंदी एक सशक्त भाषा,अपने जीवन में बढ़ाये उपयोग-राजीव रंजन सिंहअपने घर में उपयोग से हिंदी को मिलेगी मजबूती-प्रो एस पी सिंह बघेल
New Delhi, Jan 11, विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह की अध्यक्षता में आज मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की तृतीय संयुक्त हिन्दी सलाहकार समिति की बैठक नई दिल्ली में सम्पन्न हुई।
सरकारी सूत्रों ने आज बताया कि इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और  सभी सदस्यों का वहाँ उपस्थित वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वागत किया। तत्पश्चात, मंत्रालय के दोनों विभागों, मत्स्यपालन विभाग और पशुपालन एवं डेयरी विभाग की ओर से उनके यहाँ किए जा रहे राजभाषा कार्यान्वयन कार्यों के संबंध में एक प्रस्तुति की गई, जिसमें उल्लेखित प्रगति एवं प्रयासों की समिति के सदस्यों ने सराहना की। इस अवसर पर मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय मंत्री राजीव रंजन सिंह और मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय राज्य मंत्री प्रो एस पी सिंह बघेल ने संयुक्त रूप से  इस अवसर पर पशुपालन और डेयरी विभाग तथा मत्स्यपालन विभाग की हिंदी पत्रकाओं क्रमशः सुरभि,  मत्स्य भारती और मत्स्य कीर्ति तथा विभागीय शब्दावली का विमोचन किया।
इस मौके पर केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि हिंदी एक सशक्त भाषा है और हमे अपनी हीन भावना से ऊपर उठकर सरकारी और निजी कार्यो में इसका अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए,तभी हम उसे आगे बढ़ा पाएंगे।
राज्य मंत्री प्रो एस पी सिंह बघेल ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी की बेहतरी के लिए हमे उसका उपयोग अपने घर से ही प्रारंभ करना होगा,तभी आने वाली पीढ़ी को उसकी महत्ता पता चलेगी।
विभागीय मंत्रियों ने अपने सम्बोधन में मत्स्यपालन विभाग और पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा किए गए बेहतर राजभाषा कार्यान्वयन के लिए संबन्धित अधिकारियों को बधाई दी तथा मंत्रालय के दैनिक कार्यालयी कार्यों में राजभाषा हिन्दी के अधिक से अधिक प्रयोग की अपील की।
कार्यसूची पर विस्तृत विचार-विमर्श के दौरान समिति के सभी सदस्यों ने राजभाषा के कार्यान्वन हेतु किए गए प्रयासों और प्रयत्नों की सराहना की और मंत्रालय में हिन्दी के प्रयोग को प्रोत्साहित करने  तथा लक्ष्यों को प्राप्त करने संबंधी अपने विस्तृत सुझाव और विचार प्रस्तुत किए। विशेष रूप से, सभी गैर सरकारी सदस्यों ने पिछली बैठक की तुलना में मत्स्यपालन विभाग और पशुपालन एवं डेयरी विभाग में हिंदी के प्रयोग की दिशा में हुई प्रगति की सराहना की।