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~ग्लोबल वार्मिंग के कारण असहनीय गर्मी का स्तर बढ़ता जा रहा है, जिसके लिए रासायनिक खेती भी जिम्मेदार
~राज्यपाल ने प्राकृतिक कृषि उत्पादों और विभिन्न विभागों के 22 स्टॉलों का किया अवलोकन
~प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को समर्पित पुस्तक “नैसर्गिक नवसारी की प्रेरक सफलता गाथा” का राज्यपाल के करकमलों से विमोचन
~सभी किसानों से प्राकृतिक खेती का संकल्प लेकर आने वाली पीढ़ी को उपजाऊ धरती की भेंट देने का राज्यपाल का आह्वान
Navsari, Gujarat, March 11, गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत की अध्यक्षता में चिखली तालुका के रूमला गांव में आज ‘प्राकृतिक कृषि परिसंवाद’ आयोजित किया गयी।
श्री देवव्रत अपने दो दिवसीय प्रवास पर राज्य के नवसारी पहुंचे। इस दौरान चिखली तहसील के रूमला गांव में उनकी अध्यक्षता में ‘प्राकृतिक कृषि परिसंवाद’ का आयोजन किया गया।
राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत ने इस अवसर पर किसानों के साथ सीधा संवाद कर प्राकृतिक खेती के महत्व पर विशेष बल देते हुए कहा कि आज ग्लोबल वार्मिंग के कारण असहनीय गर्मी का स्तर बढ़ता जा रहा है, जिसके लिए रासायनिक खेती भी जिम्मेदार है। डीएपी और यूरिया में नाइट्रोजन होता है और हवा में ऑक्सीजन होती है। इन दोनों के मिलने से नाइट्रस ऑक्साइड गैस बनती है, जो वातावरण के लिए अत्यंत घातक है और कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में 312 गुना अधिक हानिकारक है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से गर्मी बढ़ रही है, बीमारियां बढ़ रही हैं और पर्यावरण को नुकसान हो रहा है।
राज्यपाल ने अपने स्वयं के उदाहरण से स्पष्ट किया कि हुए कहा कि पहले वह भी रासायनिक उर्वरकों से खेती करते थे, लेकिन जब उन्हें यह पता चला कि उनकी भूमि बंजर होती जा रही है, पानी का अत्यधिक उपयोग हो रहा है और उत्पादन भी अपेक्षित नहीं मिल रहा है, तब उन्होंने अपनी 200 एकड़ भूमि में पूर्ण रूप से प्राकृतिक खेती शुरू की। उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती की तुलना में इसमें खर्च लगभग शून्य है और पानी की खपत भी लगभग 50 प्रतिशत कम हो जाती है। उन्होंने किसानों को प्रोत्साहित करते हुए अनुरोध किया कि शुरुआत में पूरे खेत में नहीं, बल्कि केवल एक एकड़ के एक कोने से प्राकृतिक खेती का प्रयोग शुरू करें और उसके सकारात्मक परिणाम देखकर धीरे-धीरे इसका विस्तार करें।
श्री आचार्य देवव्रत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश और गुजरात में प्राकृतिक खेती को जन आंदोलन बनाने का अभियान तेज हुआ है। राज्य में वर्तमान में लगभग 8 लाख किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। प्रधानमंत्री द्वारा प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के रूप में लागू किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के किसानों और नागरिकों को जहरमुक्त आहार उपलब्ध कराकर उन्हें स्वस्थ रखना है। रासायनिक खेती के कारण बंजर होती जा रही हमारी धरती माता को पुनः जीवित करने और भूजल स्तर को बचाने के लिए अब प्राकृतिक खेती ही एकमात्र विकल्प है। प्राकृतिक खेती से विकसित भारत का प्रधानमंत्री का सपना साकार होगा।
रासायनिक खेती के गंभीर परिणामों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यूरिया, डीएपी और जहरीले कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि के मित्र माने जाने वाले केंचुए और सूक्ष्म जीव नष्ट हो गए हैं। यह रासायनिक जहर अब केवल खेत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि माताओं के दूध और भूजल में भी मिल चुका है, जो कैंसर जैसी घातक बीमारियों का मूल कारण बन रहा है। अगर यह पद्धति जारी रही तो भविष्य में भूमि कठोर और बंजर हो जाएगी।
प्राकृतिक खेती के लाभ समझाते हुए राज्यपाल ने प्रत्येक किसान को प्राकृतिक खेती का संकल्प दिलाया और इस ईश्वरीय कार्य की दिशा में आगे बढ़कर आने वाली पीढ़ी को उपजाऊ धरती की भेंट देने का आह्वान किया। उन्होंने आशा जतायी कि आने वाली पीढ़ी आपको इसके लिए नमन करेगी। प्राकृतिक खेती में जीवामृत, बीजामृत और आच्छादन जैसी पद्धतियां अपनाने से भूमि में ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ता है। केंचुओं द्वारा किया जाने वाला प्राकृतिक ‘वॉटर हार्वेस्टिंग’ भूमि को भुरभुरी बनाता है और उसकी नमीधारण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करता है, जिससे उत्पादन भी निरंतर बढ़ता है। अगर ईमानदारीपूर्वक प्राकृतिक खेती के पांच आयामों का उपयोग किया जाए तो आय बढ़ेगी और भूमि भी उर्वर बनेगी। इसी मार्ग को अपनाकर हम आने वाली पीढ़ी को विषमुक्त पर्यावरण, उपजाऊ भूमि और निरोगी जीवन का अमूल्य उपहार दे सकते हैं।
जिला कलेक्टर क्षिप्रा आग्रे ने राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत सहित मंचासीन महानुभावों का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि आत्मा परियोजना, कृषि विभाग के अधिकारियों और प्रगतिशील किसानों के संयुक्त प्रयासों से प्राकृतिक खेती का संदेश जन-जन तक पहुंच रहा है। जिले में अधिक से अधिक किसान प्राकृतिक खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा देशी गौ-पालन पोषण योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में 811 किसानों को 79.75 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई है।
कार्यक्रम से पूर्व राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत को गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया गया। जिला कलेक्टर ने वारली पेंटिंग भेंट करके उनका स्वागत किया। इस अवसर पर आत्मा विभाग की विभिन्न योजनाओं तथा सरकार की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं और प्राकृतिक कृषि उत्पादों के 22 स्टॉलों का राज्यपालश्री ने अवलोकन किया और स्टॉल धारकों से आत्मीय संवाद किया। प्रगतिशील 6 किसानों को राज्यपालश्री आचार्य देवव्रतजी ने सम्मानित किया। प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को समर्पित पुस्तक “नैसर्गिक नवसारी की प्रेरक सफलता गाथा” का राज्यपाल के करकमलों से विमोचन किया गया। प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों ने अपनी सफलता की गाथा भी साझा की। अंत में जिला विकास अधिकारी पुष्पलता ने आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष परेशभाई देसाई, पुलिस अधीक्षक राहुल पटेल, चीखली के प्रांत अधिकारी मितेश पटेल, आत्मा परियोजना निदेशक सतीश धीमर, जिला कृषि अधिकारी अतुल गजेरा, वांसदा परियोजना प्रशासक प्रणव विजयवर्गीय सहित संबंधित विभागों के अधिकारीगण, पदाधिकारीगण तथा बड़ी संख्या में किसान भाई-बहन उपस्थित रहे।

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