~गुजरात के खिजडिया पक्षी अभयारण्य में ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क के प्रजनन पर गीर फाउंडेशन के अध्ययन में 100 प्रतिशत फ्लेजिंग सफलता दर्ज हुई।
Gandhinagar, Gujarat, Aug 25 (VNI): गुजरात के जामनगर जिले में स्थित खिजडिया पक्षी अभयारण्य ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क (Ephippiorhynchus asiaticus), यानी काली गर्दन वाले सारस, के लिए अत्यंत अनुकूल प्रजनन स्थल के रूप में सामने आया है। गुजरात वन विभाग के अधीनस्थ स्वायत्त संस्था गुजरात इकोलॉजिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (गीर) फाउंडेशन के शोधकर्ताओं के अध्ययन में चार सक्रिय घोंसलों से सभी आठ बच्चों के सफलतापूर्वक घोंसले से बाहर आने की पुष्टि हुई है।
पीयर-रिव्यूड अंतरराष्ट्रीय जर्नल Journal of Threatened Taxa में प्रकाशित अध्ययन में जुलाई 2024 से मार्च 2025 के बीच ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क की आबादी, प्रजनन पारिस्थितिकी, घोंसले के स्थानों और प्रजनन सफलता का मूल्यांकन किया गया। शोधकर्ताओं ने अभयारण्य के आठ मैनेजमेंट जोन में 48 जियोरेफरेंस्ड सैंपलिंग प्वाइंट के माध्यम से 320 घंटे से अधिक का क्षेत्रीय अवलोकन किया। अध्ययन के दौरान चार सक्रिय घोंसलों में चार प्रजनन जोड़ियों ने कुल आठ बच्चों का सफलतापूर्वक पालन किया, जबकि पांच गैर-प्रजनन वयस्क पक्षियों सहित अभयारण्य में इस प्रजाति की संख्या 21 से अधिक दर्ज की गई।
अध्ययन में पाया गया कि चारों घोंसले बबूल के पेड़ों पर जमीन से तीन से 4.5 मीटर की ऊंचाई पर बनाए गए थे। सभी घोंसले 0.3 से 0.7 मीटर गहरे उथले पानी वाले क्षेत्रों के निकट थे, जहां खुला पानी, जल सतह के ऊपर की वनस्पति और ऊंचे क्षेत्र मौजूद थे। शोधकर्ताओं के अनुसार ये परिस्थितियां मछली, उभयचर, क्रस्टेशियन और जलीय अकशेरुकी जीवों सहित पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराती हैं।
वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने गीर फाउंडेशन की शोध टीम को बधाई देते हुए कहा कि अध्ययन ने ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क के व्यवहार और प्रजनन पारिस्थितिकी पर नया प्रकाश डाला है। वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार खिजडिया पक्षी अभयारण्य सहित गुजरात की प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के लिए लगातार कदम उठा रही है।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) डॉ. जयपाल सिंह ने कहा कि ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क के लिए केवल पानी की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है। सफल प्रजनन के लिए उपयुक्त भोजन क्षेत्र, जलीय शिकार, घोंसला बनाने योग्य पेड़, उथला पानी, वनस्पति और कम मानवीय हस्तक्षेप भी जरूरी हैं। गीर फाउंडेशन के उप निदेशक अमितकुमार नायक के अनुसार, घोंसलों की पारिस्थितिक विशेषताएं भविष्य में आवास प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण संकेत प्रदान करती हैं।
अध्ययन में ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क की मजबूत अभिभावकीय देखभाल भी सामने आई। 89 निरीक्षणों के दौरान वयस्क पक्षी औसतन 62 मिनट तक घोंसले में मौजूद रहे और भोजन के लिए दर्ज 94 प्रतिशत उड़ानों में एक अभिभावक पक्षी ने दूसरे का स्थान लिया। घोंसलों के निरीक्षण के दौरान शिकारी हमले, घोंसला छोड़ने या बच्चों की मृत्यु की कोई घटना दर्ज नहीं हुई और चारों घोंसलों से बच्चों के सफलतापूर्वक बाहर आने के कारण 100 प्रतिशत फ्लेजिंग सफलता दर दर्ज की गई। शोधकर्ताओं के अनुसार स्थिर जल परिस्थितियां, पर्याप्त भोजन और अपेक्षाकृत कम मानवीय हस्तक्षेप खिजडिया में इस उल्लेखनीय प्रजनन सफलता के प्रमुख कारण हैं। VNI NEWS, Khijadiya Bird Sanctuary, Black-necked Stork, Gujarat, GEER Foundation, Bird Conservation, Jamnagar, Ramsar Site, Gujarat Forest Department, Wildlife Conservation,VNINews, VNINews.com
