~Gujarat field trials by GBRC and SDAU found turmeric yield of over 40 tonnes per hectare under natural farming, more than double conventional farming.
Gandhinagar, Gujarat, Sep 25 (VNI): गुजरात में प्राकृतिक खेती से हल्दी की उपज दोगुने से अधिक होने की सफलता सामने आई है। गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (GBRC) और सरदारकृषिनगर दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय (SDAU) द्वारा किए गए फील्ड ट्रायल में पाया गया कि रासायनिक खेती की तुलना में प्राकृतिक खेती पद्धति से हल्दी की प्रति हेक्टेयर उपज 40 टन से अधिक रही, जबकि परंपरागत खेती में यह 19.3 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई।
भारत में प्राकृतिक कृषि पद्धति को वैज्ञानिक आधार प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू किए गए बायोटेक्नोलॉजी-आधारित शोध कार्यक्रम के तहत हल्दी की खेती में ये प्रयोग किए गए। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने बताया कि 2026 में BMC Plant Biology जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में परंपरागत रासायनिक खेती की तुलना प्राकृतिक खेती के नौ अलग-अलग ट्रीटमेंट कॉम्बिनेशन से की गई। उन्होंने कहा कि अध्ययन के निष्कर्ष किसानों और कृषि वैज्ञानिकों को प्राकृतिक खेती की दिशा में वैज्ञानिक पद्धति से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे।
अध्ययन के अनुसार, प्राकृतिक खेती में बीजामृत, जीवामृत और घनजीवामृत जैसे पारंपरिक जैविक फॉर्मूलेशन का उपयोग किया गया तथा गेहूं के भूसे की मल्चिंग भी की गई। गुजरात स्टेट बायोटेक्नोलॉजी मिशन (GSBTM) के मिशन डायरेक्टर दिग्विजयसिंह जाडेजा ने बताया कि इन प्राकृतिक खेती इनपुट के मूल्यांकन के साथ बायोटेक्नोलॉजी का उपयोग कर इनके प्रभावों का अध्ययन किया गया। GBRC ने इन इनपुट का माइक्रोबियल और मेटाबोलोमिक विश्लेषण किया, जिसमें अनेक लाभदायी सूक्ष्मजीवों और 11 अलग-अलग वर्गों में करीब 300 से 500 महत्वपूर्ण मेटाबोलाइट्स की पहचान हुई।
सरदारकृषिनगर दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने बताया कि विश्वविद्यालय में सफलता के बाद किसानों को हल्दी की प्राकृतिक खेती के लिए प्रशिक्षण दिया गया और किसानों के खेतों में भी अच्छे परिणाम मिले हैं। उन्होंने कहा कि कई किसान अब इस पद्धति से हल्दी की खेती कर रहे हैं और उनकी आय में वृद्धि हुई है। शोध में प्राकृतिक खेती से मिट्टी में लाभदायी सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ने की भी जानकारी सामने आई। प्रीस्टिया और एसिडोबैक्टीरिया समूह के सूक्ष्मजीवों के साथ ह्यूमिकोला, मोर्टिरेला और ट्राइकोडर्मा जैसे लाभदायी फंगस में वृद्धि दर्ज की गई।
आर्थिक दृष्टि से भी अध्ययन में प्राकृतिक खेती की संभावनाएं सामने आई हैं। अध्ययन के अनुसार, प्राकृतिक खेती में इनपुट की लागत के बावजूद प्रति हेक्टेयर 10.5 लाख रुपये से अधिक का शुद्ध लाभ दर्ज किया गया, जबकि परंपरागत खेती में यह लगभग 3.61 लाख रुपये रहा। कृषि मंत्री जीतूभाई वाघाणी ने कहा कि ‘बायोटेक्नोलॉजी इंटरवेंशन्स थ्रू नेटवर्क रिसर्च प्रोग्राम ऑन भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (BPKP)’ का उद्देश्य फसल उत्पादकता बढ़ाने, मिट्टी की सेहत बहाल करने और पर्यावरण-अनुकूल टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए पारंपरिक कृषि पद्धतियों को आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों के साथ जोड़ना है। कार्यक्रम में आठ कृषि-जलवायु जोन और 18 फसलों को शामिल किया गया है। VNI NEWS, Natural Farming, Turmeric Farming, Gujarat Agriculture, GBRC, SDAU, Biotechnology, Sustainable Agriculture, Natural Farming Research, Turmeric Yield, Gujarat Biotechnology Mission, Natural farming turmeric yield Gujarat, turmeric natural farming, Gujarat natural farming research, GBRC turmeric study, SDAU natural farming, biotechnology in agriculture, sustainable turmeric farming
