~Gujarat introduces mandatory mental health and suicide prevention measures for all schools affiliated with GSHSEB for Classes 9 to 12, including counselling, wellness teams and student support systems.
Gandhinagar, Gujarat, Nov 01 (VNI) : गुजरात सरकार ने विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक कल्याण और आत्महत्या की रोकथाम के लिए राज्य के सभी माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में नए नियम लागू करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत गुजरात माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (जीएसएचएसईबी) से संबद्ध कक्षा 9 से 12 तक के सभी स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता, नियमित काउंसलिंग और जोखिमग्रस्त विद्यार्थियों की समय पर पहचान के लिए विशेष व्यवस्था करना अनिवार्य होगा।
परीक्षाओं में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, अधिक अंक लाने का दबाव, सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल, पारिवारिक अपेक्षाएं, सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियां और भविष्य की चिंता विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में शिक्षा विभाग ने गुजरात माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा विनियम, 1974 में नया प्रावधान शामिल किया है। शिक्षा मंत्री डॉ. प्रद्युम्नभाई वाजा और शिक्षा राज्य मंत्री रीवाबा जाडेजा के मार्गदर्शन में विनियम-16(अ) जोड़ा गया है, जबकि परिशिष्ट-8 में मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण और आत्महत्या की रोकथाम के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए हैं।
यह निर्णय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शैक्षणिक संस्थानों के लिए जारी मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम संबंधी बाध्यकारी दिशा-निर्देशों तथा केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की ‘उम्मीद’ (UMMEED) मार्गदर्शिका को भी इसका आधार बनाया गया है। उम्मीद का अर्थ है—समझना, प्रेरित करना, प्रबंधन करना, सहानुभूति रखना, सशक्त बनाना और विकास करना। नए नियमों के अनुसार स्कूलों को विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित, तनावमुक्त और सहयोगपूर्ण वातावरण सुनिश्चित करना होगा।
राज्य के प्रत्येक संबद्ध स्कूल में ‘स्कूल वेलनेस टीम’ (SWT) का गठन अनिवार्य होगा। स्कूल के प्राचार्य टीम लीडर और स्कूल काउंसलर अथवा नामित शिक्षक को-ऑर्डिनेटर होंगे। टीम में कक्षा 9-10 और 11-12 के एक-एक शिक्षक, स्कूल प्रबंधन समिति का प्रतिनिधि, दोनों स्तरों से एक-एक पीयर मॉनिटर या ‘मनो-मित्र’ तथा एक गैर-शैक्षणिक कर्मचारी शामिल होंगे। टीम का गठन प्रत्येक शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में करना और उसके कार्यों की वार्षिक समीक्षा करना आवश्यक होगा। मनो-मित्र विद्यार्थियों को प्रारंभिक भावनात्मक सहयोग देंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें उचित मार्गदर्शन एवं विशेषज्ञ सहायता तक पहुंचाने में मदद करेंगे।
100 या उससे अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूलों में बाल एवं किशोर मानसिक स्वास्थ्य के विषय में प्रशिक्षित कम से कम एक योग्य काउंसलर, मनोवैज्ञानिक अथवा सामाजिक कार्यकर्ता नियुक्त करना अनिवार्य होगा। 100 से कम विद्यार्थियों वाले स्कूलों को बाहरी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम और ‘टेली-मानस’ सेवाओं के साथ औपचारिक रेफरल व्यवस्था स्थापित करनी होगी। बोर्ड परीक्षाओं, परीक्षा परिणामों और कक्षा 8 से 9 तथा कक्षा 10 से 11 में प्रवेश जैसे महत्वपूर्ण संक्रमण काल में विद्यार्थियों के लिए विशेष मार्गदर्शन और काउंसलिंग की व्यवस्था भी करनी होगी।
नए नियमों में स्कूलों के भीतर सकारात्मक और समानतापूर्ण वातावरण बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। विद्यार्थियों को परीक्षा परिणामों, अंकों या शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर अलग-अलग समूहों में बांटना, सार्वजनिक रूप से अपमानित करना, अन्य विद्यार्थियों से तुलना करना या कलंकित करना प्रतिबंधित होगा। ऐसी गतिविधियों और परंपराओं पर भी रोक होगी, जिनसे विद्यार्थियों में तनाव, भय, हीनभावना या भावनात्मक असुरक्षा पैदा हो। इसके स्थान पर समानता, गरिमा, प्रोत्साहन और सहयोग की भावना को बढ़ावा देना होगा।
विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण के लिए योग, ध्यान, कला, संगीत, बागवानी, नृत्य और खेलकूद जैसी गतिविधियों का नियमित आयोजन करना होगा। इसके साथ ही खेल महाकुंभ, फिनिशिंग स्कूल, सप्तधारा, परीक्षा पे चर्चा, एनएसएस, एनसीसी, स्काउट-गाइड और समाजसेवा जैसी सह-शैक्षणिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। विद्यार्थियों को अपनी चिंताओं और भावनात्मक कठिनाइयों को गोपनीय तरीके से साझा करने के लिए स्कूल काउंसलर या नामित शिक्षक तक आसान पहुंच उपलब्ध करानी होगी। हेल्प बॉक्स अथवा सुझाव पेटी जैसी व्यवस्था भी स्थापित करनी होगी।
सरकार द्वारा सार्वजनिक किए गए चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर और स्कूल वेलनेस टीम के संपर्क नंबर स्कूल की वेबसाइट, नोटिस बोर्ड, कक्षाओं, छात्रावासों और काउंसलिंग कक्ष में स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। सभी शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को वर्ष में कम से कम दो बार प्रमाणित मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से प्रशिक्षण लेना होगा। स्कूलों में मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता, मानसिक तनाव के चेतावनी संकेतों की पहचान, स्वयं को नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति से संबंधित परिस्थितियों में प्रतिक्रिया और विशेषज्ञों तक रेफरल की व्यवस्था उपलब्ध रखनी होगी।
यदि कोई विद्यार्थी स्वयं को नुकसान पहुंचाने, आत्महत्या के विचार, गंभीर मानसिक तनाव या अन्य जोखिमपूर्ण व्यवहार का संकेत देता है, तो स्कूल को तत्काल और संवेदनशील कार्रवाई करनी होगी। स्वयं को नुकसान पहुंचाने की किसी घटना के बाद विद्यार्थी को अकेला नहीं छोड़ना होगा और आवश्यकता के अनुसार तत्काल चिकित्सा या आपातकालीन सहायता उपलब्ध करानी होगी। विद्यार्थियों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और अन्य संवेदनशील व्यक्तिगत विवरणों की गोपनीयता बनाए रखना भी अनिवार्य होगा। ऐसी जानकारी केवल विद्यार्थी की सुरक्षा, उपचार, काउंसलिंग या कल्याण से सीधे जुड़े अधिकृत व्यक्तियों के साथ साझा की जा सकेगी।
आत्महत्या की किसी घटना के बाद स्कूलों को अन्य विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और प्रभावित परिवारजनों के लिए आवश्यक मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक सहायता उपलब्ध करानी होगी। घटना से संबंधित जानकारी तथ्यों पर आधारित और जिम्मेदारीपूर्वक साझा करनी होगी। मीडिया से संपर्क केवल प्राचार्य अथवा अधिकृत अधिकारी के माध्यम से किया जा सकेगा। घटना के तरीके, स्थान, तस्वीरों या संवेदनशील व्यक्तिगत विवरणों को सार्वजनिक करने की अनुमति नहीं होगी।
यौन उत्पीड़न, रैगिंग, बुलिंग, साइबर बुलिंग और जाति, वर्ग, लिंग, धर्म, भाषा, सामाजिक-आर्थिक स्थिति अथवा दिव्यांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव के विरुद्ध मजबूत, गोपनीय और सुलभ शिकायत निवारण व्यवस्था स्थापित करनी होगी। स्कूलों को शिकायतों की समयबद्ध और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी होगी। यदि किसी स्कूल को जोखिमपूर्ण परिस्थिति की जानकारी होने के बावजूद समय पर उचित कार्रवाई नहीं करने के कारण विद्यार्थी को गंभीर नुकसान पहुंचता है, तो इसे ‘संस्थागत दोष’ माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित स्कूल या जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कानून और नियमों के अनुसार दंडात्मक अथवा कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
विद्यार्थियों पर शैक्षणिक और करियर संबंधी दबाव कम करने के लिए नियमित करियर मार्गदर्शन भी अनिवार्य किया गया है। स्कूलों को विद्यार्थियों को विभिन्न शैक्षणिक, व्यावसायिक, कौशल-आधारित और उद्यमिता संबंधी विकल्पों की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इन दिशा-निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन, निरीक्षण और निगरानी के लिए जिला मजिस्ट्रेट अथवा जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय निगरानी समिति गठित की जाएगी। समिति स्कूलों में नियमों के पालन की समीक्षा करेगी, आवश्यक मार्गदर्शन एवं समन्वय उपलब्ध कराएगी, शिकायतों और गंभीर घटनाओं पर नजर रखेगी तथा सुधारात्मक उपायों की सिफारिश करेगी। समिति के निर्देशों का पालन सभी स्कूलों के लिए अनिवार्य होगा।
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