~Barda Wildlife Sanctuary in Gujarat is home to 17 Asiatic lions, with a scientific study highlighting its potential as a long-term habitat for lion conservation.
Porbandar, Gujarat, Oct 11 (VNI): पोरबंदर तथा देवभूमि द्वारका जिलों में 192.31 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले बरडा वन्यजीव अभयारण्य में वर्तमान में 17 शेर रह रहे हैं। हाल ही में किए गए एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, बरडा का जंगल एशियाई शेरों के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण आश्रयस्थल के रूप में विकसित हो सकता है।
गिर के जंगल से बाहर अपने पारंपरिक क्षेत्र का विस्तार कर रहे शेरों के लिए बरडा की चट्टानी पहाड़ियाँ, घास के मैदान, पर्याप्त शिकार और अनुकूल पर्यावरणीय परिस्थितियाँ एक सुरक्षित नया आवास उपलब्ध करा रही हैं।
वन विभाग के अनुसार, एशियाई शेरों की एकमात्र प्राकृतिक आबादी लंबे समय से गुजरात के गिर क्षेत्र में केंद्रित रही है। हालांकि, अब शेर अपने पारंपरिक क्षेत्र से बाहर भी विस्तार कर रहे हैं। लगभग 144 वर्षों के अंतराल के बाद शेरों ने प्राकृतिक रूप से बरडा के जंगल में फिर से अपना ठिकाना बनाया। शुरुआत में एक नर शेर यहाँ आया था, जिसके बाद गुजरात वन विभाग ने पाँच मादा शेरों को यहाँ स्थानांतरित किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में वन्यजीवों के संरक्षण एवं सुरक्षा के प्रयासों को गति मिली है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार भी गिर के शेरों के संरक्षण और उनके सुरक्षित आवास के विस्तार के लिए विभिन्न कदम उठा रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने बरडा के जंगल में रहने वाले पशुपालकों के लिए पुनर्वास योजना की घोषणा की है।
“Beyond Gir: Barda Wildlife Sanctuary as a Potential Stronghold for Asiatic Lions” शीर्षक वाला यह अध्ययन PLOS One में प्रकाशित हुआ है। गुजरात वन विभाग के मोहन राम (IFS), आराधना साहू (IFS), नित्यानंद श्रीवास्तव (IFS), रोहित चौधरी, लहर झाला और यशपाल झाला तथा बांदा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने इसमें योगदान दिया। अध्ययन में बरडा के जंगल में लौटे शेरों के क्षेत्र उपयोग, आवास चयन और आहार का विश्लेषण किया गया। शोध के निष्कर्षों के अनुसार, बरडा में शेरों की दीर्घकालिक मौजूदगी बनाए रखने के लिए आवश्यक आवास, पर्याप्त शिकार और अनुकूल पारिस्थितिक परिस्थितियाँ उपलब्ध हैं।
वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि एशियाई शेरों के संरक्षण की दृष्टि से यह अत्यंत महत्वपूर्ण शोध है। उन्होंने कहा कि शेरों की आबादी अब केवल गिर के जंगल तक सीमित नहीं रही है। गिर के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र से बाहर फैलकर आने वाले शेरों के लिए बरडा का जंगल दूसरा घर बन रहा है और वैज्ञानिक अध्ययन के निष्कर्ष इसकी पुष्टि करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में राज्य सरकार गुजरात में एशियाई शेरों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है और उनके दीर्घकालिक अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने बताया कि शेरों के संरक्षण के लिए वन विभाग की निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है। फ्रंटलाइन स्टाफ के रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा गया है और शेरों की गतिविधियों तथा स्वास्थ्य पर दैनिक निगरानी रखने के लिए आठ पूर्णकालिक शेर ट्रैकर तैनात किए गए हैं। इसके अलावा, मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था को भी मजबूत बनाया गया है।
जूनागढ़ वन वृत्त के वन संरक्षक एवं अध्ययन के लेखक मोहन राम (IFS) ने बताया कि बरडा वन्यजीव अभयारण्य में वर्तमान में 17 शेर हैं। शोध के दौरान छह शेरों—एक नर और पाँच मादाओं—को रेडियो-कॉलर लगाया गया था। जनवरी 2023 से जुलाई 2025 के बीच इन शेरों की 1.69 लाख से अधिक GPS लोकेशन प्राप्त की गईं। इन आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला कि शेर बरडा के जंगल में घास के मैदानों का सक्रिय रूप से उपयोग कर रहे हैं। वे अपनी होम रेंज स्थापित करने के साथ-साथ सामाजिक संबंध भी विकसित कर रहे हैं।
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) डॉ. जयपाल सिंह ने कहा कि वन विभाग बरडा में शेरों के लिए पर्याप्त शिकार आधार विकसित करने पर विशेष ध्यान दे रहा है। वर्ष 2025–26 के दौरान गिर वन्यजीव अभयारण्य से 441 चीतल बरडा के जंगल में छोड़े गए थे। वर्ष 2007 से अब तक बड़ी संख्या में चीतल को यहाँ छोड़ा जा चुका है। इसके अतिरिक्त, सांभर का संवर्धन कर उन्हें भी जंगल में छोड़ा जाता है, जिससे शेरों के लिए पर्याप्त शिकार उपलब्ध कराने और उनके आवास को मजबूत बनाने में मदद मिलती है।
बरडा वन्यजीव अभयारण्य में संरक्षण के साथ-साथ इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। जूनागढ़ वन्यजीव वृत्त के वन संरक्षक डॉ. राम रतन नाला (IFS) ने बताया कि वर्ष 2024 में अभयारण्य में इको-टूरिज्म की शुरुआत की गई थी। इस पहल से स्थानीय निवासियों के लिए नेचर गाइड और सफारी ऑपरेटर के रूप में रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। पर्यटकों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। अभयारण्य में पहले वर्ष 2,271 पर्यटक आए थे, जबकि वर्ष 2025–26 में यह संख्या बढ़कर 3,359 हो गई। इस प्रकार पर्यटकों की संख्या में लगभग 48 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वन विभाग की संरक्षण गतिविधियों, शिकार आधार के विकास, वैज्ञानिक निगरानी और इको-टूरिज्म की पहलों से बरडा एशियाई शेरों के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में उभर रहा है। VNI NEWS, Barda Wildlife Sanctuary, Asiatic Lions, Gujarat Forest Department, Porbandar, Devbhoomi Dwarka, Gir Lions, Wildlife Conservation, Lion Habitat, Eco-Tourism Gujarat, Gujarat Government, Barda Wildlife Sanctuary 17 lions, Asiatic lions in Gujarat, Barda lion conservation, Barda Wildlife Sanctuary study, Gujarat lion habitat, Asiatic lion population expansion, VNINews, VNINews.com
