~Gujarat CM Bhupendra Patel, Union Minister Sarbananda Sonowal and Assam CM Himanta Biswa Sarma laid the foundation stone for India’s first port-based e-methanol plant at Kandla.
Gandhidham-Kutch, Gujarat, Sep 26 (VNI): गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, केंद्रीय बंदरगाह, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल तथा असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को कांडला स्थित दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण (डीपीए) में देश के पहले बंदरगाह-आधारित ई-मेथनॉल संयंत्र की आधारशिला रखी। 2,300 करोड़ रुपये की यह परियोजना हरित ईंधन उत्पादन और स्वच्छ समुद्री परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
150 टन प्रतिदिन क्षमता वाला यह संयंत्र नवीकरणीय ऊर्जा, पानी और जैविक स्रोतों से प्राप्त कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग कर ई-मेथनॉल का उत्पादन करेगा। इसका उपयोग एशिया-यूरोप अंतरराष्ट्रीय व्यापार गलियारे पर चलने वाले जहाजों को हरित ईंधन उपलब्ध कराने में किया जाएगा। परियोजना के जरिए भारत को वैश्विक समुद्री परिवहन क्षेत्र के लिए हरित ईंधन के प्रमुख उत्पादक और निर्यातक के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य है।
दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण और नामरूप स्थित असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड (एपीसीएल) की संयुक्त पहल वाली इस परियोजना को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। पहले चरण में 1,200 करोड़ रुपये के निवेश से प्रतिदिन 50 टन उत्पादन क्षमता जोड़ी जाएगी, जिसे जनवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। दूसरे चरण में 1,100 करोड़ रुपये के निवेश से प्रतिदिन 100 टन अतिरिक्त क्षमता विकसित की जाएगी और इसे मार्च 2027 तक पूरा करने की योजना है। परियोजना में डीपीए और एपीसीएल का पूंजीगत योगदान 76:24 के अनुपात में होगा। डीपीए 567.32 करोड़ रुपये की इक्विटी पूंजी के साथ 75 एकड़ भूमि, अलवणीकृत जल और हरित हाइड्रोजन के रूप में नवीकरणीय ऊर्जा उपलब्ध कराएगा।
यह संयंत्र भारत की सबसे बड़ी ई-मेथनॉल उत्पादन सुविधाओं में से एक होगा और इससे 3,500 से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। परियोजना से कांडला और आसपास के क्षेत्रों में परिवहन, भंडारण, आपूर्ति तथा हरित ईंधन से जुड़ी अन्य गतिविधियों सहित पूरी हरित ऊर्जा मूल्य श्रृंखला को बढ़ावा मिलेगा। परियोजना में उत्पादित हरित मेथनॉल की अनुमानित लागत लगभग 750 अमेरिकी डॉलर प्रति टन बताई गई है, जबकि वैश्विक दर करीब 1,300 अमेरिकी डॉलर प्रति टन है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी और हरित तरीके से आगे बढ़ रहा है तथा गुजरात को इस यात्रा का नेतृत्व करने पर गर्व है। उन्होंने कहा कि कच्छ और गुजरात का लंबा समुद्र तट कांडला के माध्यम से दुनिया के जहाजों को ऊर्जा देगा और यह संयंत्र गुजरात की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को निर्यात में बदलने के साथ राज्य के तट को भारत की हरित ऊर्जा के प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करेगा।
सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि भारत अब जहाज और कंटेनर बनाने के साथ वैश्विक व्यापार को संचालित करने वाला स्वच्छ ईंधन भी तैयार करेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में कांडला सिंगापुर-रॉटरडैम मार्ग पर हरित ईंधन का केंद्र बन सकता है और यह संयंत्र देश के अन्य प्रमुख बंदरगाहों के लिए मॉडल बनेगा। डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि असम अपनी उद्यमशीलता, धूप, जलविद्युत क्षमता और प्राकृतिक संसाधनों के आधार पर हरित ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि नामरूप से कांडला तक असम की कंपनी की यह पहल पूर्वोत्तर भारत की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता को देश के पश्चिमी तट से जोड़ती है।
इस अवसर पर कच्छ लोकसभा सांसद विनोद चावड़ा, गांधीधाम विधायक मालतीबेन किशोर माहेश्वरी, असम सरकार के राजनीतिक सचिव तरंगा गोगोई, असम पेट्रोकेमिकल्स के अध्यक्ष बिकुल डेका, उपाध्यक्ष हेमंत गोगोई तथा दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण के अध्यक्ष सुशील कुमार सिंह सहित सरकार और दोनों संगठनों के अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। समारोह गांधीधाम स्थित डीपीए प्रदर्शनी मैदान में आयोजित किया गया। VNI NEWS, Kandla E-Methanol Plant, Deendayal Port Authority, DPA, Assam Petro-Chemicals, Bhupendra Patel, Sarbananda Sonowal, Himanta Biswa Sarma, Green Fuel, Green Methanol, Gujarat, Assam, Kutch
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