~राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर गुजरात ने हथकरघा क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की हैं। 12,000 से अधिक बुनकरों और कारीगरों को सरकारी सहायता मिली, जबकि 51.07 करोड़ रुपये से अधिक का संयुक्त कारोबार हुआ।

Gandhinagar, Gujarat, Aug 06, 2026 (VNI): समग्र देश में 7 अगस्त को 12वाँ राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर गुजरात ने हथकरघा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज करते हुए 12,000 से अधिक बुनकरों और कारीगरों को सरकारी योजनाओं से जोड़कर उन्हें आर्थिक संबल प्रदान किया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार के प्रयासों से पारंपरिक हथकरघा कला को आधुनिक बाजार से जोड़ने में सफलता मिली है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2015 में चेन्नई से राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुरुआत की थी। गुजरात में खादी, कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग, इंडस्ट्रियल एक्सटेंशन ब्यूरो (INDEXTb-C) तथा गुजरात राज्य हथकरघा एवं हस्तकला विकास निगम (GSHHDC) और उसके ब्रांड ‘गरवी गुर्जरी’ के माध्यम से हजारों बुनकरों को प्रशिक्षण, डिजाइन विकास, विपणन और बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में इंडेक्स्ट-सी से 4,000 से अधिक तथा गरवी गुर्जरी से लगभग 8,000 कारीगर जुड़े हुए हैं।
वर्ष 2025-26 में गरवी गुर्जरी ने अपने 53 वर्षों के इतिहास में सर्वाधिक 43.07 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की, जबकि इंडेक्स्ट-सी द्वारा आयोजित मेलों एवं प्रदर्शनियों में पिछले दो वर्षों के दौरान 8 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री हुई। इस प्रकार गुजरात के हथकरघा क्षेत्र का संयुक्त कारोबार 51.07 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया, जो राज्य की पारंपरिक कला की बढ़ती आर्थिक क्षमता को दर्शाता है।
गुजरात का लगभग दो हजार वर्ष पुराना वस्त्र इतिहास आज भी विश्वभर में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। पाटन का पटोला, कच्छ की भुजोडी शॉल, सुरेन्द्रनगर की टांगलिया बुनाई, भरूच की सुजनी और जामखंभालिया की शॉल जैसे उत्पादों को वैश्विक बाजार में विशेष पहचान मिली है। इनमें से कई उत्पादों को जीआई टैग भी प्राप्त हो चुका है, जिससे उनकी मांग लगातार बढ़ रही है।
राज्य सरकार का कहना है कि कृषि के बाद हथकरघा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का सबसे बड़ा साधन बनकर उभरा है। महिलाएं, युवा और बुजुर्ग घर-आधारित उत्पादन के माध्यम से आजीविका बढ़ा रहे हैं। सरकार का मानना है कि पारंपरिक कला, आधुनिक डिजाइन और प्रभावी विपणन के समन्वय से गुजरात का हथकरघा क्षेत्र न केवल सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित कर रहा है, बल्कि आर्थिक विकास का भी मजबूत माध्यम बनता जा रहा है। VNI NEWS, National Handloom Day, Gujarat Handloom, Garvi Gurjari, Patola, Bhujodi Shawl, GSHHDC, INDEXTb-C, Gujarat Weavers,  Weavers, Textile, Rural Economy, VNINews, VNINews.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *