~अमितभाई शाह ने गुजरात विद्यापीठ के 72वें दीक्षांत समारोह में गांधीजी के जीवन संदेश, खादी, भारतीय ज्ञान परंपरा और विकसित भारत के संकल्प पर जोर दिया।
Ahmedabad, Gujarat, Aug 27 (VNI): केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमितभाई शाह ने गुरुवार को कहा कि गांधीजी का जीवन संदेश कल भी प्रासंगिक था, आज भी है और आने वाले समय में भी शाश्वत रहेगा। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के विचारों में भारतीय ज्ञान परंपरा, सनातन जीवन मूल्यों और भारतीय संस्कृति का समन्वय निहित है।
अहमदाबाद स्थित Gujarat Vidyapith के 72वें दीक्षांत समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए श्री शाह ने विद्यापीठ के साथ अपने पुराने जुड़ाव को याद किया। उन्होंने बताया कि वह विद्यापीठ की लाइब्रेरी में घंटों अध्ययन करते रहे हैं और उसी संस्थान के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होना उनके लिए गौरव का विषय है। उन्होंने विद्यापीठ परिसर को स्वतंत्रता संग्राम की रणनीतियों और राष्ट्रीय शिक्षा पद्धति का मॉडल तैयार करने वाली तपोभूमि बताया।
ऐतिहासिक प्राणजीवन विद्यार्थी भवन के प्रांगण में आयोजित समारोह में सात विद्याशाखाओं के 18 विभागों के कुल 900 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई। इनमें 459 छात्र और 441 छात्राएं शामिल हैं। शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ गांधीवादी मूल्यों, सामाजिक सेवा, अनुसंधान और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 11 विद्यार्थियों को ‘कुलाधिपति मंदिर पदक’ और ‘ध्वज पदक’ से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विद्यापीठ की वार्षिक रिपोर्ट का भी विमोचन किया गया।
श्री शाह ने खादी के साथ अपने व्यक्तिगत जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि खादी केवल वस्त्र या आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति की चिंता करने वाला गांधीवादी विचार है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में देश में खादी ग्रामोद्योग का कारोबार कई गुना बढ़ा है, जो गांधीवादी विचारों की स्वीकार्यता को दर्शाता है। उन्होंने गांधीजी के ‘सात सामाजिक पाप’, 11 व्रत तथा स्वभाषा के आग्रह को आज भी प्रासंगिक बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भी मातृभाषा, कौशल, भारतीय ज्ञान परंपरा और सर्वांगीण विकास को महत्व दिया गया है।
विद्यार्थियों को संदेश देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि विद्यापीठ से बाहर निकलने से पहले युवाओं को अपने लिए नहीं, बल्कि देश, समाज और गरीबों के कल्याण के लिए लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। देश के लिए लक्ष्य निर्धारित होने पर कठिन परिस्थितियों और असफलताओं के बावजूद निराशा नहीं घेरती। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्रभाई मोदी के नेतृत्व में देश भारतीय मूल तत्वों और आधुनिकता के समन्वय के साथ पुनर्निर्माण के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2047 में भारत की स्वतंत्रता की शताब्दी तक देश को प्रत्येक क्षेत्र में अग्रणी और आत्मनिर्भर बनाने के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने में विद्यापीठ के डिग्रीधारकों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।
दीक्षांत समारोह में विद्यापीठ के कुलाधिपति एवं गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने गुरुकुल परंपरा, वेद-उपनिषद के आदर्शों और महात्मा गांधी के मूल्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा पूर्ण करने के बाद समाज के प्रति उत्तरदायित्व स्वीकार करने का महत्वपूर्ण अवसर है। तैत्तिरीय उपनिषद का उल्लेख करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को पारिवारिक जिम्मेदारी निभाने, सामाजिक ऋण चुकाने तथा राष्ट्र की मूल संस्कृति और मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
राज्यपाल ने कहा कि माता-पिता, गुरु और परिवार के प्रति जिम्मेदारी निभाना शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। उन्होंने समाज से प्राप्त ज्ञान को जरूरतमंदों तक पहुंचाने और स्वाध्याय में कभी प्रमाद न करने का आह्वान किया। उन्होंने वेद, उपनिषद, गीता और रामायण के विचारों तथा अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे मूल्यों को भारत की पहचान बताया। डिजिटल युग में युवाओं से सोशल मीडिया पर सत्य और असत्य में विवेक करने तथा मन, वचन और कर्म में एकरूपता रखते हुए सत्य के मार्ग पर चलने का आग्रह किया।
विद्यापीठ के कुलपति डॉ. हर्षद पटेल ने स्वागत संबोधन में कहा कि संस्था विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि गांधीजी के हृदय, हाथ और मस्तिष्क के सर्वांगीण विकास के सिद्धांत के अनुरूप सफाई, कताई, खादी, सामूहिक जीवन और सामुदायिक सेवा का प्रशिक्षण भी देती है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप देश के 18 राज्यों से आने वाले विद्यार्थियों को 22 भाषाएं सीखने का विकल्प, AI कौशल, भारतीय ज्ञान प्रणाली, कौशल विकास केंद्र, युवा खेलकूद और ग्रामजीवन पदयात्रा जैसी गतिविधियों के माध्यम से राष्ट्रीयता और गांधीवादी मूल्यों से जोड़ा जा रहा है।
समारोह में सांसद हसमुखभाई पटेल, विधायक अमितभाई ठाकर सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, पूर्व मंत्री भूपेंद्रसिंह चूडासमा, विद्यापीठ के पदाधिकारी, ट्रस्टी, कुलसचिव हिमांशु पटेल, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, स्नातक संघ के प्रतिनिधि, सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र के अग्रणी, विद्यार्थी और अभिभावक उपस्थित रहे। VNI NEWS, Amit Shah, Gujarat Vidyapith, Gandhiji message, 72nd Convocation, Gandhi values, Developed India 2047, Gandhiji, Mahatma Gandhi, Convocation, Gujarat, Acharya Devvrat, Developed India, NEP 2020, Khadi, VNINews, VNINews.com
