~Gujarat Governor Acharya Devvrat urges media to promote natural farming and highlights the progress of chemical-free agriculture in Gujarat.

Gandhinagar, Gujarat, Sep 15 (VNI): गुजरात के गांधीनगर स्थित लोकभवन के महर्षि दयानंद सभामंडप में मंगलवार को राज्यपाल आचार्य देवव्रत की अध्यक्षता में राज्य के वरिष्ठ पत्रकारों, संपादकों और तंत्री के लिए प्राकृतिक कृषि संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में प्राकृतिक खेती के महत्व, रासायनिक कृषि के दुष्प्रभावों और गुजरात में प्राकृतिक कृषि अभियान की प्रगति पर चर्चा की गई।
आचार्य देवव्रत ने अपने गुरुकुल कुरुक्षेत्र के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि वहां 180 एकड़ भूमि पर पहले रासायनिक उर्वरकों और जहरीले कीटनाशकों से खेती होती थी। एक दिन खेत में कीटनाशक का छिड़काव कर रहा मजदूर जहरीली गंध के कारण बेहोश होकर गिर पड़ा और तीन दिन के उपचार के बाद उसकी जान बच सकी। इस घटना ने उन्हें रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों पर गंभीरता से सोचने के लिए प्रेरित किया और उन्होंने रासायनिक खेती को हमेशा के लिए बंद करने का संकल्प लिया।
राज्यपाल ने कहा कि रासायनिक खेती छोड़ने के बाद उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर जैविक खेती अपनाई, लेकिन इसमें कई व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आईं। उन्होंने प्राकृतिक खेती को प्रभावी विकल्प बताते हुए कहा कि इसमें सूक्ष्म जीवाणुओं, देशी केंचुओं और मित्र कीटों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जीवामृत, घनजीवामृत और आच्छादन के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता, ऑर्गेनिक कार्बन और जल धारण क्षमता में सुधार किया जा सकता है।
आचार्य देवव्रत ने हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने पहाड़ी गांवों में सेब बागानों और पॉलीहाउस किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया। उनके अनुसार, दो वर्षों में 35,000 किसान इस अभियान से जुड़े और आज हिमाचल प्रदेश में 2.5 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। गुजरात में प्रधानमंत्री नरेंद्रभाई मोदी के मार्गदर्शन और राज्य सरकार के सहयोग से 8 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती की दिशा में आगे बढ़े हैं। किसानों के प्राकृतिक उत्पादों की सीधी बिक्री के लिए राज्य में 300 से अधिक स्थायी बिक्री केंद्र भी शुरू किए गए हैं।
संगोष्ठी के समापन पर राज्यपाल ने मीडिया प्रतिनिधियों और संपादकों से प्राकृतिक खेती के संदेश को समाज के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल कोई कार्यक्रम नहीं, बल्कि धरती को रसायनमुक्त करने, जल एवं पर्यावरण संरक्षण तथा मानवजाति को गंभीर बीमारियों से बचाने का राष्ट्रीय सेवा-यज्ञ है। उन्होंने कहा कि इस संदेश को जन-जन तक पहुंचाने में मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। संगोष्ठी के बाद उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों के साथ सहज संवाद भी किया। इस अवसर पर कृषि मंत्री जीतुभाई वाघाणी, कृषि विभाग के अग्र सचिव आर. सी. मीणा, सूचना एवं प्रसारण विभाग के सचिव विक्रांत पांडे, लोकभवन के सचिव मेहुल दवे तथा वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। VNI NEWS, Acharya Devvrat, Natural Farming, Gujarat Natural Farming, Natural Agriculture, Gujarat Agriculture, Chemical-Free Farming, Gujarat Farmers, Gandhinagar, Natural Farming Seminar, Acharya Devvrat Natural Farming, Gujarat Natural Farming, Natural Farming in Gujarat, Chemical-Free Agriculture, VNINews, VNINews.com

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