~दक्षिण गुजरात में बाढ़ से प्रभावित बागवानी किसानों की मदद के लिए राज्य सरकार, बागवानी विभाग और नवसारी कृषि यूनिवर्सिटी ने वैज्ञानिक पद्धति से गिरे हुए वृक्षों को पुनर्जीवित करने का अभियान शुरू किया।

Gandhinagar, Gujarat, Aug 03 (VNI): दक्षिण गुजरात में प्राकृतिक आपदा और भारी वर्षा से बागवानी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। वर्षों की मेहनत से तैयार किए गए आम सहित अन्य फलदार वृक्षों के गिर जाने से किसान चिंतित हैं। ऐसे समय में राज्य सरकार, बागवानी विभाग और नवसारी कृषि यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक किसानों की सहायता के लिए मैदान में उतर गए हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, जिन वृक्षों या कलमों की जड़ें अभी भी मिट्टी से जुड़ी हुई हैं, उन्हें वैज्ञानिक पद्धति और उचित देखभाल के माध्यम से पुनर्जीवित किया जा सकता है। कृषि मंत्री जीतूभाई वाघाणी के निर्देश पर बागवानी विभाग और नवसारी कृषि यूनिवर्सिटी की संयुक्त टीमें वलसाड, नवसारी, सूरत, डांग और तापी जिलों के प्रभावित गांवों में पहुंचकर किसानों को प्रत्यक्ष प्रशिक्षण और डेमोंस्ट्रेशन दे रही हैं।
नवसारी के प्रगतिशील किसान मोहनभाई पटेल ने बताया कि ताउते चक्रवात के दौरान गिरे उनके आम के लगभग 70 से 80 प्रतिशत वृक्ष वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में पुनर्जीवित हो गए थे। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक पद्धति अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इससे वर्षों की मेहनत से तैयार बागवानी फसलों को बचाया जा सकता है।
नवसारी कृषि यूनिवर्सिटी के सह-अनुसंधान वैज्ञानिक डॉ. अंकुर पटेल ने किसानों को सलाह दी है कि गिरे हुए पौधों को धीरे-धीरे सीधा करें, अतिरिक्त शाखाओं की छंटाई करें, कटे हिस्सों पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (सीओसी) पेस्ट लगाएं तथा गोबर की खाद के बजाय वर्मी कम्पोस्ट, कार्बेन्डाजिम और ट्राइकोडर्मा विरिडी के वैज्ञानिक उपयोग से जड़ों की सुरक्षा करें। उन्होंने वर्षा ऋतु से पहले पौधों के चारों ओर कम से कम दो फुट ऊंचे मेड़ बनाने की भी सलाह दी, ताकि भविष्य में तेज जल प्रवाह से पौधों को सुरक्षित रखा जा सके। VNI NEWS, South Gujarat Farmers, Horticulture, Navsari Agricultural University, Tree Revival, Flood Damage, Gujarat Agriculture, Gujarat Agriculture, Horticulture, Farmers, Flood, Jitu Vaghani, VNINews, VNINews.com

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