~गिर के जंगलों में छह दशक बाद इंडियन ग्रे हॉर्नबिल की सफल वापसी हुई है। गुजरात सरकार के री-इंट्रोडक्शन प्रोजेक्ट के तहत पक्षी अब प्रजनन भी कर रहे हैं।

Gir Somnath, Gujarat, July 14 (VNI): गुजरात सरकार के वन विभाग को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक और बड़ी सफलता मिली है। लगभग छह दशक पहले गिर के जंगलों से विलुप्त हो चुकी इंडियन ग्रे हॉर्नबिल (भारतीय धूसर धनेश) अब फिर से यहां स्थायी रूप से बस गई है। वर्ष 2021 में शुरू किए गए इंडियन ग्रे हॉर्नबिल री-इंट्रोडक्शन प्रोजेक्ट के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और पक्षी अब घोंसले बनाकर सफलतापूर्वक प्रजनन भी कर रहे हैं।
वन विभाग के अनुसार, हाल ही में गोडावण संरक्षण परियोजना की सफलता के बाद यह उपलब्धि गुजरात के वन्यजीव संरक्षण मॉडल को और मजबूत बनाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में लुप्तप्राय वन्यजीवों के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए वैज्ञानिक प्रयास किए जा रहे हैं। गुजरात में भी गिर के जंगलों में इंडियन ग्रे हॉर्नबिल की वापसी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में अरावली क्षेत्र से लाकर गिर में छोड़े गए हॉर्नबिल अब यहां के प्राकृतिक वातावरण में पूरी तरह ढल चुके हैं और उनका सफल प्रजनन इस परियोजना की ऐतिहासिक सफलता का प्रमाण है। वहीं राज्य मंत्री प्रवीण माली ने कहा कि गुजरात का वन्यजीव संरक्षण मॉडल पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत बन रहा है।
हाल ही में अंतरराष्ट्रीय पीयर-रिव्यूड जर्नल ‘Birds’ में प्रकाशित शोध पत्र “Reintroduction of Indian Grey Hornbills in Gir, India: Insights into Ranging, Habitat Use, Nesting and Behavioral Pattern” में इस परियोजना का विस्तृत वैज्ञानिक आकलन प्रस्तुत किया गया है। वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव विनोद राव ने बताया कि पहले वर्ष में एक जोड़े तथा दूसरे वर्ष में तीन अतिरिक्त जोड़ों ने सफल प्रजनन किया। उन्होंने कहा कि इंडियन ग्रे हॉर्नबिल बीजों के प्राकृतिक प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे जंगलों के पुनर्जीवन और जैव विविधता को बढ़ावा मिलता है।
जूनागढ़ वन सर्कल के वन संरक्षक एवं अध्ययन के सह-लेखक मोहन राम ने बताया कि परियोजना के दो चरणों में कुल 40 इंडियन ग्रे हॉर्नबिल गिर में छोड़े गए। वर्ष 2021-22 में 28 और वर्ष 2023 में 12 पक्षियों को पुनर्स्थापित किया गया। इनमें से 11 नर पक्षियों पर सैटेलाइट ट्रांसमीटर लगाए गए, जिनसे उनकी गतिविधियों, आवास चयन और प्रजनन व्यवहार की लगातार निगरानी की गई। अध्ययन में पाया गया कि शुरुआती महीनों में इन पक्षियों का औसत विचरण क्षेत्र लगभग 61 वर्ग किलोमीटर था, जो बाद में घटकर 5.7 वर्ग किलोमीटर रह गया। इसी तरह उनकी औसत दैनिक उड़ान 4.3 किलोमीटर से घटकर 1.4 किलोमीटर रह गई, जो गिर के पारिस्थितिक तंत्र के साथ उनके सफल अनुकूलन का स्पष्ट संकेत है। VNI NEWS, Indian Grey Hornbill, Gir Forest, Gujarat Forest Department, Wildlife Conservation, Reintroduction Project, Gujarat, Forest Department, Biodiversity, Reintroduction, Environment, VNINews, VNINews.com

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