~गौतम अदाणी ने स्वतंत्रता दिवस संदेश में विश्वास को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताया और कर्मचारियों से मूल्यों, चरित्र व सत्य पर कायम रहने का आह्वान किया।

Ahmedabad, Gujarat, Aug 12 (VNI): अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर समूह के कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि किसी पोर्ट, एयरपोर्ट या ऊर्जा परियोजना का निर्माण नहीं, बल्कि अदाणी परिवार के लोगों का विश्वास है। उन्होंने कहा कि विश्वास जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है और इसे एक बार नहीं, बल्कि हर दिन अपने काम, व्यवहार और चरित्र से अर्जित करना पड़ता है।
‘अपनी बात, अपनों के साथ’ संवाद की दूसरी कड़ी में अदाणी ने अपने बचपन, माता-पिता से मिले संस्कार, 16 वर्ष की उम्र में घर छोड़ने और मुंबई में अपने शुरुआती दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता शांतिलाल जी ने उन्हें ईमानदारी, वचन निभाने और विश्वास को सबसे बड़ा सम्मान मानने की सीख दी, जबकि मां ने त्याग, सादगी और परिवार का महत्व सिखाया। उन्होंने कहा कि औपचारिक शिक्षा सीमित रही, लेकिन जीवन उनका सबसे बड़ा शिक्षक बना।
अदाणी ने कहा कि मुंबई में हीरों के कारोबार से शुरू हुए सफर ने उन्हें सिखाया कि जिस तरह हीरे को चमकने के लिए लगातार तराशना पड़ता है, उसी तरह इंसान भी संघर्ष और अनुभवों से निखरता है। उन्होंने कहा कि मुंद्रा पोर्ट, खावड़ा, नवी मुंबई एयरपोर्ट और गोड्डा जैसे बड़े प्रोजेक्ट बनाना कठिन है, लेकिन इन सबसे कठिन निर्माण विश्वास का है। उन्होंने कहा कि हर बड़े सफर में मंथन और परीक्षा आती है तथा कठिन परिस्थितियां व्यक्ति और संस्था के चरित्र की परीक्षा लेती हैं।
हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद उत्पन्न परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय समूह का करीब 20,000 करोड़ रुपये का फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) चल रहा था। उन्होंने कहा कि कानूनी तौर पर राशि अपने पास रखने का अधिकार होने के बावजूद समूह ने निवेशकों के हित को प्राथमिकता देते हुए पूरी राशि वापस करने का निर्णय लिया। उन्होंने इसे अपने पिता से मिली ‘विश्वास की विरासत’ का पालन बताया। उन्होंने कहा कि कानून अधिकार देता है, लेकिन मूल्य व्यवस्था यह तय करती है कि उस अधिकार का उपयोग कब करना चाहिए।
अमेरिका में चली न्यायिक प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए अदाणी ने कहा कि समूह ने शोर का जवाब शोर से देने के बजाय धैर्य, संयम और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा किया। उन्होंने कहा कि “सत्य को शोर की आवश्यकता नहीं होती, उसे केवल समय की आवश्यकता होती है।” उन्होंने दावा किया कि कठिन दौर के बावजूद समूह ने अपने इतिहास का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, नए प्रोजेक्ट आगे बढ़ाए और भविष्य को और मजबूत बनाया।
उन्होंने खावड़ा में 45 डिग्री से अधिक तापमान में काम कर रहे युवा इंजीनियर अमित कुमार से हुई मुलाकात का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास का अर्थ केवल पोर्ट, पावर प्लांट या एयरपोर्ट बनाना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में नई रोशनी लाना भी है। इसी सोच से आंखों के स्वास्थ्य के क्षेत्र में अखंड ज्योति के साथ साझेदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अदाणी फाउंडेशन शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक विकास के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में काम कर रहा है।
गौतम अदाणी ने कहा कि जब भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब देश की उपलब्धियों का आकलन केवल गीगावाट, पोर्ट और एयरपोर्ट की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से भी होगा कि कितने लोगों के जीवन में बदलाव आया और कितने सपनों को नई उड़ान मिली। उन्होंने युवाओं को शिक्षा को पूरे मन से अपनाने और कर्मचारियों को कठिन परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों से समझौता नहीं करने की सलाह दी।
अपने संबोधन के अंत में अदाणी ने हरिवंश राय बच्चन की पंक्तियों “तू न थकेगा कभी, तू न रुकेगा कभी” का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन में चुनौतियां आती रहेंगी, लेकिन मूल्यों, चरित्र, साथियों, परिवार, देश और सत्य पर विश्वास बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि अदाणी परिवार की यात्रा अभी पूरी नहीं हुई है और आने वाले समय में भी अनेक कहानियां और नए सफर बाकी हैं। उन्होंने कर्मचारियों और उनके परिवारों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनका विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है। VNI NEWS, Gautam Adani, Adani Group, Independence Day 2026, Adani Employees, Trust, Corporate Values, Hindenburg Report, Khavda, Mundra Port, Adani Foundation,  Gautam Adani Independence Day message, Adani Group trust, Adani corporate values, Gautam Adani employees address, VNINews, VNINews.com

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